संपत्ति विवरण में बड़ा खुलासा: UP में ‘बड़े साहब’ पीछे, ‘बाबू’ आगे, 47 हजार का वेतन रोका गया

संपत्ति विवरण में बड़ा खुलासा: UP में ‘बड़े साहब’ पीछे, ‘बाबू’ आगे, 47 हजार का वेतन रोका गया

Major Revelation in Property Details

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लखनऊ। Major Revelation in Property Details: 8.65 लाख से अधिक राज्यकर्मियों की चल-अचल संपत्ति का ब्योरा जुटाने को लेकर गंभीर योगी सरकार के कड़े रुख का असर ‘बड़े साहब’ से ज्यादा तृतीय व चतुर्थ श्रेणी कर्मियों में देखने को मिल रहा है।

मानव संपदा पोर्टल पर संपत्ति का ब्योरा अपलोड करने वाले 8.18 लाख कार्मिकों में राज्य के प्रथम-द्वितीय श्रेणी के अधिकारी, तृतीय व चतुर्थ श्रेणी कर्मियों से पीछे हैं। प्रथम श्रेणी के जहां 83 प्रतिशत अधिकारियों ने ही संपत्ति बताई है वहीं सर्वाधिक तृतीय श्रेणी के 96 प्रतिशत कार्मिकों ने अपनी संपत्ति पोर्टल पर अपलोड की है।

उत्तर प्रदेश सरकारी कर्मचारी आचरण नियमावली के तहत प्रदेश के सभी श्रेणियों के राज्यकर्मियों को अपनी पिछले वर्ष तक की चल-अचल संपत्ति का वार्षिक पिछले माह जनवरी में अनिवार्य रूप से मानव संपदा पोर्टल के माध्यम से देना था।

हालांकि, 31 जनवरी की मध्य रात्रि में पोर्टल बंद होने तक 47,816 राज्यकर्मियों ने अपनी संपत्ति अपलोड नहीं की। गौर करने की बात यह है कि संपत्ति न बताने वालों में सर्वाधिक 16.89 प्रतिशत प्रथम श्रेणी और 13.92 प्रतिशत द्वितीय श्रेणी के अधिकारी ही हैं।

चतुर्थ श्रेणी (अनुसेवक, चालक, माली, सफाईकर्मी आदि) के 7.34 प्रतिशत जबकि सबसे कम 4.03 प्रतिशत तृतीय श्रेणी के लिपिक, सिपाही आदि हैं। पोर्टल पर 1601 राज्यकर्मी ऐसे भी हैं जिनकी श्रेणी तय नहीं है। इनमें से भी 823 ने अपनी संपत्ति नहीं बताई है।

नियुक्ति एवं कार्मिक विभाग के प्रमुख सचिव एम. देवराज ने बताया कि जिन कार्मिकों ने विधिवत संपत्ति का ब्योरा पोर्टल पर नहीं दिया है उन्हें जनवरी का वेतन फरवरी में नहीं मिलेगा।

संपत्ति बताने वाले कार्मिकों को ही वेतन का भुगतान करने संबंधी निर्देश छह जनवरी को मुख्य सचिव एसपी गोयल की ओर से आहरण वितरण अधिकारियों(डीडीओ) को दिए गए थे।

देवराज ने बताया कि संपत्ति का ब्योरा दिए बिना किसी को वेतन मिलने पर डीडीओ से जवाब-तलब कर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि सभी 587 आइएएस ने स्पैरो (स्मार्ट परफार्मेंस अप्रेजल रिपोर्ट रिकार्डिंग आनलाइन विंडो) पोर्टल के माध्यम से अपनी संपत्ति का ब्योरा दे दिया है।

संपत्ति न बताने वाले संदेह के दायरे में

अनिवार्यता के बावजूद चल-अचल संपत्ति बताने से कतराने वाले कार्मिकों को सरकार संदेह की नजर से देख रही है। सूत्रों के अनुसार पूर्व में भी संपत्ति का ब्योरा न देने वाले खासतौर से प्रथम-द्वितीय श्रेणी के कार्मिकों के खिलाफ जांच कराई जा सकती है।

जानकारों का कहना है कि फंसने के डर से ही कुछ अधिकारी जानबूझकर संपत्ति का ब्योरा नहीं दे रहे हैं। कारण है कि यदि ऐसी कोई संपत्ति पाई जाती है जिसे खरीदने से पहले विभाग से अनुमति नहीं ली गई है तो उस पर कार्रवाई हो सकती है।

इसी तरह अपलोड किए गए ब्योरे में यदि किसी संपत्ति का ब्योरा नहीं दिया गया और शिकायत पर जांच में संपत्ति सामने आने पर भी कार्रवाई तय है। जिन प्रमुख विभागों के सर्वाधिक कार्मिकों ने संपत्ति नहीं बताई है उनमें स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा, बेसिक व माध्यमिक शिक्षा, लोक निर्माण, राजस्व, पंचायती राज, गृह, पशुधन, वित्त, वन, बाल विकास एवं पुष्टाहार, सिंचाई आदि हैं।

संपत्ति बताने वाले श्रेणीवार कार्मिकों का ब्योरा

श्रेणी कुल कर्मी ब्योरा देने वाले (प्रतिशत में)
1 13,236 11,001 (83.11%)
2 41,270 35,526 (86.08%)
3 6,16,862 5,91,980 (95.97%)
4 1,92,491 1,78,359 (92.66%)
अन्य 1,601 778 (48.59%)
कुल 8,65,460 8,17,644 (94.48%)